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Saturday, July 2, 2022

श्री राम चालीसा ~ Shri Ram Chalisa in Hindi

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Nirmal Rabari
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Mr. Nirmal Rabari is the founder and CEO of NMR Infotech Private Limited, NMR Enterprise, Graphicstic, and ShortBlogging, all of which were established with the simple goal of providing outstanding value to clients. He launched a real initiative of worldwide specialists to steer India's economy on the right path by assisting startups in the information technology area.
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॥ चौपाई ॥

श्रीरघुवीर भक्त हितकारी। सुनलीजै प्रभु अरज हमारी॥
निशिदिनध्यान धरै जो कोई।ता सम भक्त औरनहिं होई॥

ध्यानधरे शिवजी मन माहीं। ब्रह्मइन्द्र पार नहिं पाहीं॥

दूततुम्हार वीर हनुमाना। जासुप्रभाव तिहूं पुर जाना॥

तब भुज दण्ड प्रचण्डकृपाला। रावण मारि सुरनप्रतिपाला॥

तुमअनाथ के नाथ गुंसाई।दीनन के हो सदासहाई॥

ब्रह्मादिकतव पारन पावैं। सदाईश तुम्हरो यश गावैं॥

चारिउवेद भरत हैं साखी।तुम भक्तन की लज्जा राखीं॥

गुणगावत शारद मन माहीं।सुरपति ताको पार नपाहीं॥

नामतुम्हार लेत जो कोई।ता सम धन्य औरनहिं होई॥

रामनाम है अपरम्पारा। चारिहुवेदन जाहि पुकारा॥

गणपतिनाम तुम्हारो लीन्हो। तिनको प्रथम पूज्य तुम कीन्हो॥

शेषरटत नित नाम तुम्हारा।महि को भार शीशपर धारा॥

फूलसमान रहत सो भारा।पाव न कोऊ तुम्हरोपारा॥

भरतनाम तुम्हरो उर धारो। तासोंकबहुं न रण मेंहारो॥

नामशक्षुहन हृदय प्रकाशा। सुमिरतहोत शत्रु कर नाशा॥

लखनतुम्हारे आज्ञाकारी। सदा करत सन्तनरखवारी॥

तातेरण जीते नहिं कोई।युद्घ जुरे यमहूं किनहोई॥

महालक्ष्मीधर अवतारा। सब विधि करतपाप को छारा॥

सीताराम पुनीता गायो। भुवनेश्वरी प्रभाव दिखायो॥

घट सों प्रकट भईसो आई। जाको देखतचन्द्र लजाई॥

सो तुमरे नित पांव पलोटत।नवो निद्घि चरणन में लोटत॥

सिद्घिअठारह मंगलकारी। सो तुम परजावै बलिहारी॥

औरहुजो अनेक प्रभुताई। सोसीतापति तुमहिं बनाई॥

इच्छाते कोटिन संसारा। रचत न लागतपल की बारा॥

जो तुम्हे चरणन चित लावै।ताकी मुक्ति अवसि हो जावै॥

जय जय जय प्रभुज्योति स्वरूपा। नर्गुण ब्रह्म अखण्ड अनूपा॥

सत्यसत्य जय सत्यव्रत स्वामी।सत्य सनातन अन्तर्यामी॥

सत्यभजन तुम्हरो जो गावै। सोनिश्चय चारों फल पावै॥

सत्यशपथ गौरीपति कीन्हीं। तुमने भक्तिहिं सब विधि दीन्हीं॥

सुनहुराम तुम तात हमारे।तुमहिं भरत कुल पूज्यप्रचारे॥

तुमहिंदेव कुल देव हमारे।तुम गुरु देव प्राणके प्यारे॥

जो कुछ हो सोतुम ही राजा। जयजय जय प्रभु राखोलाजा॥

रामआत्मा पोषण हारे। जयजय दशरथ राज दुलारे॥

ज्ञानहृदय दो ज्ञान स्वरूपा।नमो नमो जय जगपतिभूपा॥

धन्यधन्य तुम धन्य प्रतापा।नाम तुम्हार हरत संतापा॥

सत्यशुद्घ देवन मुख गाया।बजी दुन्दुभी शंख बजाया॥

सत्यसत्य तुम सत्य सनातन।तुम ही हो हमरेतन मन धन॥

याकोपाठ करे जो कोई।ज्ञान प्रकट ताके उर होई॥

आवागमनमिटै तिहि केरा। सत्यवचन माने शिर मेरा॥

और आस मन मेंजो होई। मनवांछित फलपावे सोई॥

तीनहुंकाल ध्यान जो ल्यावै। तुलसीदल अरु फूल चढ़ावै॥

सागपत्र सो भोग लगावै।सो नर सकल सिद्घतापावै॥

अन्तसमय रघुबरपुर जाई। जहां जन्महरि भक्त कहाई॥

श्रीहरिदास कहै अरु गावै।सो बैकुण्ठ धाम को पावै॥

।।दोहा।।

सातदिवस जो नेम कर, पाठ करे चित लाय।
हरिदासहरि कृपा से, अवसिभक्ति को पाय॥

रामचालीसा जो पढ़े, रामचरण चित लाय।
जो इच्छा मन में करै, सकल सिद्ध हो जाय॥

।।इतिश्रीप्रभु श्रीराम चालीसा समाप्त:।।

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